Tuesday, 31 January 2017

छत्तीसगढ़ शासन विरूद्ध गणेशलाल मेश्राम (भ्रष्‍ट्राचार निवारण अधिनियम)

उभय-पक्ष के निवेदन पर विचार करते हुये धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध में अभियुक्त का एक वर्ष के कठोर कारावास और 1,000/-(एक हजार) रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है। अर्थदण्ड नहीं पटाने की दशा में एक माह का कठोर कारावास की सजा पृथक् से भुगताया जावे। अभियुक्त को धारा-13(1)(डी) सहपठित धारा-13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत् दो वर्ष के कठोर कारावास और 2,000/-(दो हजार) रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है एवं अर्थदण्ड नहीं पटाने की दशा में दो माह का कठोर कारावास की सजा पृथक् से भुगतायी जावे। अभियुक्त को दी गई दोनां सश्रम कारावास की सजाएं साथ-साथ भुगतायी जावे।

न्यायालय : विशेष न्यायाधीश (भ्रष्‍ट्राचार निवारण अधिनियम), दुर्ग 
(पीठासीन अधिकारी : सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू)  
विशेष प्रकरण क्रमांक-04/2006
संस्थित दिनांक : 08-05-2006 
छत्तीसगढ़ शासन, 
द्वारा : पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन व्‍यूरो, रायपुर (छ0ग0)           ..... अभियोजन 
।। विरूद्ध।। 
गणेशलाल मेश्राम पिता स्‍व.मोहनलाल मेश्राम उम्र 35 साल, 
निवासी : गजानन नगर, दुर्ग थाना मोहन नगर, दुर्ग, 
तहसील व जिला दुर्ग 
हाल- सहायक ग्रेड-2, खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, 
दुर्ग, जिला दुर्ग (छ0ग0)                                                                   ..... अभियुक्त 
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एन्टी करप्शन ब्यूरो, रायपुर द्वारा पंजीबद्ध अपराध क्रमांक-22/2005 से उद्भुत विशेष प्रकरण। 
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राज्य की ओर से सुश्री फरिहा अमीन, विशेष लाक अभियोजक। अभियुक्त की ओर से श्री एस.के.फरहान, अधिवक्ता। 
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।। निणर्य।। 
(आज दिनांक 28-01-2017 का घोषित किया गया) 
1- अभियुक्त के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-7, 13(1)(डी) सहपठित धारा-13(2) के अंतर्गत यह आरोप है कि उसने दिनांक 25-05-2005 के पूर्व छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, दुर्ग, जिला दुर्ग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर, जो कि लोक-सेवक का पद है, पदस्थ रहते हुए प्रार्थी राजू राजपूत, जो कि जवाहर नगर, दुर्ग में ब्राईट 2  मंदबुद्धि विद्यालय का संचालन करता है और जहां के अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रा को विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, दुर्ग द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति के लिये 6,750/-रुपये का चेक जारी किया गया था, जिसे प्रार्थी को देने में लाक-सेवक की पदीय हैसियत में शासकीय कार्य के सम्पादन हेतु वैध पारिश्रमिक से भिन्न 2,000/-रुपये रिश्वत की मांग किया तथा दिनांक 25-05-2005 का प्रातः 8. 00 बजे 2,000/-रुपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किया। 


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