Friday, 30 September 2016

अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956

वेश्यावृत्ति का अर्थ -
किसी भी व्यक्ति का आर्थिक लाभ के लिए लैंगिक शोषण करने को वेश्यावृत्ति कहते हैं।
वेश्यागृह का अर्थ -
किसी मकान, कमरे, वाहन या स्थान से या उसके किसी भाग से है, जिसमें किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए किसी का लैंगिक शोषण का दुरूपयोग किया जाए या दो या दो से अधिक महिलाओं के द्वारा अपने आपसी लाभ के लिए वेश्यावृत्ति की जाती है।
अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य अपराध हैं -
1. कोई व्यक्ति जो वेश्यागृह को चलाता है, उसका प्रबंध करता है या उसके रखने में और प्रबंध में मदद करता है तो उसको कम से कम व अधिक से अधिक तीन साल का कठोर कारावास, और 2000/- रूपये का जुर्माना होगा। यदि वह व्यक्ति दोबारा इस अपराध का दोषी पाया जाता है तो उसको कम से कम दो साल व अधिक से अधिक पांच साल का कठोर कारावास और दो हजार रूपये का जुर्माना होगा।
2. कोई व्यक्ति जो किसी मकान, या स्थान का मालिक, किराएदार, भारसाधक, एजेंट है, उसे वेश्यागृह के लिए प्रयोग करता है या उसे यह जानकारी है कि ऐसे किसी स्थान या उसके भाग को वेश्यागृह के लिए प्रयोग में लाया जाएगा,या वह अपनी इच्छा से ऐसे किसी स्थान या उसके किसी भाग को वेश्यागृह के रूप में प्रयोग करने में भागीदारी देता है। तो ऐसे व्यक्ति को दो साल तक की जेल और दो हजार रूपये का जुर्माना हो सकता है। यदि वह दोबारा इस अपराध का दोषी पाया जाता है तो उसको पांच साल के कठोर कारावास व जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
वेश्यावृत्ति की कमाई पर रहना -
कोई भी 16 साल की उम्र से अधिक व्यक्ति अगर किसी वेश्या की कमाई पर रह रहा है, तो ऐसे व्यक्ति को दो साल की जेल या एक हजार रूपये का जुर्माना हो सकता है या दोनों।
अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे या नाबालिग द्वारा की गई वेश्यावृत्ति की कमाई पर रहता है तो ऐसे व्यक्ति को कम से कम 7 साल व अधिक से अधिक 10 साल की जेल हो सकती है।
कोई भी व्यक्ति जो 16 साल से अधिक उम्र का है -
1. वेश्या के साथ उसकी संगत में रहता है, या 2. वेश्या की गतिविधियों पर अपना अधिकार, निर्देश या प्रभाव इस प्रकार डालता है, जिससे यह मालूम होता है कि वह वेश्यावृत्ति में सहायता, प्रोत्साहन या मजबूर करता है या
3. जो व्यक्ति दलाल का काम करता है।
 तो माना जाएगा कि (जब तक इसके विपरीत सिद्ध न हो जाए) कि ऐसे व्यक्ति वेश्यावृत्ति की कमाई पर रह रहे हैं।
वेश्यावृत्ति के लिए किसी व्यक्ति को लाना, फुसलाना या बहलाने की चेष्टा करनाः-
यदि कोई व्यक्ति -
1. किसी व्यक्ति को उसकी सहमति या सहमति के बिना वेश्यावृत्ति के लिए लाता है, लाने की कोशिश करता है, या
2. किसी व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए फुसलाता है, ताकि वह उससे वेश्यावृत्ति करवा सके तो ऐसे व्यक्ति को कम से कम 3 साल व अधिक से अधिक 7 साल के कठोर कारावास और 2000/- रूपये के जुर्माने से दंडित किया जाता है और अगर यह अपराध किसी व्यक्ति की सहमति के विरूद्ध किया जाता है तो दोषी व्यक्ति को सात साल की जेल जो अधिकतम 14 साल तक की हो सकती है, दंडित किया जा सकता है और अगर यह अपराध किसी बच्चे के विरूद्ध किया जाता है तो दोषी को कम से कम 7 साल की जेल, व उम्र कैद भी हो सकती है।
वेश्यागृह में किसी व्यक्ति को रोकना -
अगर कोई व्यक्ति किसी को उसकी सहमति या सहमति के बिना -
1. वेश्यागृह में रोकता है ।
2. किसी स्थान पर किसी व्यक्ति को किसी के साथ जो कि उसका पति या पत्नी नहीं है, संभोग करने के लिए रोकता है तो ऐसे व्यक्ति को कम से कम सात साल की जेल जो कि दस साल या उम्र कैद तक हो सकती है और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे के साथ वेश्यागृह में पाया जाता है, तो वह दोषी तब माना जाएगा, जब तक इसके लिए विपरीत सिद्ध नहीं हो जाता है।
अगर बच्चे या 18 वर्ष से कम उम्र का व्यक्ति वेश्यागृह में पाया जाता है, और उसकी चिकित्सीय जांच के बाद यह सिद्ध होता है कि उसके साथ लैंगिक शोषण हुआ है, तो यह माना जाएगा कि ऐसे व्यक्ति को वेश्यावृत्ति करवाने के लिए रखा गया है या उसका लैंगिक शोषण आर्थिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

अगर कोई व्यक्ति किसी महिला या लड़की का -
1. सामान जैसे गहने, कपड़े, पैसे या अन्य संपत्ति आदि अपने पास रखता है या 2. उसको डराता है कि वह उसके विरूद्ध कोई कानूनी कार्यवाही शुरू करेगा, अगर वह अपने साथ वह गहने, कपड़े, पैसे या अन्य संपत्ति जो कि ऐसे व्यक्ति द्वारा महिला या लड़की को उधार या आपूर्ति के रूप में या फिर ऐसे व्यक्ति के निर्देश में दी गई हो, ले जाएगी। तो यह माना जाएगा कि ऐसे व्यक्ति ने महिला या लड़की को वेश्यागृह में या ऐसी जगह रोका है, जहां वह महिला या लड़की कारे संभोग के लिए मजबूर कर सके।
सार्वजनिक स्थानों या उसके आस-पास वेश्यावृत्ति करना -
यदि कोई व्यक्ति जो वेश्यावृत्ति करता है या करवाता है, ऐसे स्थानों पर -
1. जो राज्य सरकार ने चिन्हित किए हों या
2. जो कि 200 मीटर के अंदर किसी सार्वजनिक पूजा स्थल, शिक्षण संस्थान, छात्रावास, अस्पताल, परिचर्या गृह ऐसा कोई भी सार्वजनिक स्थान जिसको पुलिस आयुक्त या मजिस्ट्रेट द्वारा अधिसूचित किया गया हो।
तो ऐसे व्यक्ति को 3 महीने तक का कारावास हो सकता है।
कोई व्यक्ति यदि किसी बच्चे से ऐसा अपराध करवाता है तो उसको कम से कम सात साल व अधिक से अधिक उम्र कैद या 10 साल तक की जेल हो सकती है तथा जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति जो -
1. ऐसे सार्वजनिक स्थानों का प्रबंधक है, वेश्याओं को व्यापार करने व वहां रूकने देता है।
2. कोई किराएदार, दखलदार या देखभाल करने वाला व्यक्ति वेश्यावृत्ति के लिए ऐसे स्थानों के प्रयोग की अनुमति देता है।
3. किसी स्थान का मालिक, एजेंट ऐसे स्थानों को वेश्यावृत्ति के लिए किराए पर देता है।  तो वह तीन महीने के कारावास और 200/- रू. के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
यदि वह व्यक्ति फिर ऐसे अपराध का दोषी पाया जाता है तो वह छः महीने की जेल और दो सौ रूपये के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
अगर ऐसा अपराध किसी होटल में किया जाता है तो उस होटल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
वेश्यावृत्ति के लिए किसी को फुसलाना या याचना करना -
अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर किसी व्यक्ति को किस घर या मकान से इशारे, आवाज, अपने आपको दिखाकर किसी खिड़की या बालकनी से वेश्यावृत्ति के लिए आकर्षित, फुसलाता या विनती करता है या छेड़छाड़, आवारागर्दी या इस प्रकार का कार्य करता है, जिससे यहां पर रहने वाले या आने-जाने वालों को बाधा या परेशानी होती है, तो उसको 6 महीने की जेल और पांच सौ रूपये के जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
अगर वह फिर से यह अपराध करता है तो उसको एक साल की जेल और पांच हजार रूपये के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
अगर यह अपराध कोई पुरूष करता है तो वह कम से कम सात सात दिन तथा अधिक से अधिक तीन महीने की जेल से दंडित किया जा सकता है।
अपने संरक्षण में रहने वाले व्यक्ति को फुसलाना -
यदि कोई व्यक्ति अपने संरक्षण, देखभाल में रहने वाले किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के लिए फुसलाता है, उकसाता है या सहायता करता है, तो वह कम से कम सात साल की जेल जो कि उम्र कैद या दस साल तक सजा हो सकती है, जेल व जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
सुधार संस्था में भेजने का आदेश -
सार्वजनिक स्थानों या उनके आस-पास वेश्यावृत्ति करना, वेश्यावृत्ति के लिए किसी फुसलाना या याचना करने के संबंध में दोषी महिला को उसकी शारीरिक या मानसिक स्थिति के आधार पर न्यायालय उसको सुधार संस्था में भी भेजने का आदेश दे सकता है। सुधार संस्था में कम से कम दो साल व अधिक से अधिक पांच साल के लिए भेजा जा सकता है।
विशेष पुलिस अधिकारी एवं सलाहकार बॉडी -
राज्य सरकार इस अधिनियम के अंतर्गत अपराधों के संबंध में विशेष पुलिस अधिकारियों को नियुक्त करेगी।
सरकार कुछ महिला सहायक पुलिस अधिकारियों की भी नियुक्ति कर सकती है।
इस अधिनियक के अंदर दिए गए सभी अपराध संज्ञेय हैं -
इस अधिनियम के अंदर दिए गए अपराध के दोषी व्यक्ति को विशेष पुलिस अधिकारी या उसके निर्देश के बिना, वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।
तलाशी लेना -
विशेष पुलिस अधिकारी या दुर्व्यापार पुलिस अधिकारी बिना वारंट के किसी स्थान की तलाशी तब ले सकते हैं, जब उनके साथ उस स्थान के दो या दो से अधिक सम्मानित व्यक्तियों, जिनमें कम से कम एक महिला भी साथ हो।
वहां पर मिलने वाले व्यक्तियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। ऐसे व्यक्तियों की आयु, लैंगिक शोषण, व यौन संबंधी बीमारियों की जानकारी के लिए चिकित्सीय जांच करायी जाएगी।
ऐसे स्थानों पर मिलने वाली महिलाएं या लड़कियों से, महिला पुलिस अधिकारी ही पूछताछ कर सकती है।
वेश्यागृह से छुड़ाना -अगर मजिस्ट्रेट को किसी पुलिस अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति से सूचना मिलती है कि कोई व्यक्ति वेश्यावृत्ति कर रहा है या करता रहा है तो पुलिस अधिकारी (जो इंस्पेक्टर की श्रेणी से उच्च का होगा) उस स्थान की तलाशी लेने और वहां मिलने वाले लोगों को उसके सामने पेश करने को कह सकता है।
वेश्यागृह को बंद करना -
मजिस्ट्रेट को पुलिस से या किसी अन्य व्यक्ति से सूचना मिलती है कि कोई घर मकान, स्थान आदि सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के भीतर वेश्यावृत्ति के लिए प्रयोग किया जा रहा है तो वह उस जगह के मालिक किराएदार, एजेंट या जो उस स्थान की देखभाल कर रहा है, उसे नोटिस देगा कि वह सात दिन के अंदर जवाब दें कि क्यों न उस स्थान को अनैतिक काम के लिए प्रयोग किए जाने वाला घोषित किया जावे।
संबंधित पक्ष को सुनने के बाद यदि यह लगता है कि वहां पर वेश्यावृत्ति हो रही है तो मजिस्ट्रेट सात दिन के अंदर उसको खाली करने व उसकी अनुमति के बिना किराये पर न देने के आदेश दे सकता है।
संरक्षण गृह में रखने के लिए आवेदन -
कोई व्यक्ति जो वेश्यावृत्ति करता है या जिससे वेश्यावृत्ति करायी जाती है, वह मजिस्ट्रेट से संरक्षण गृह में रखने व न्यायालय से सुरक्षा के लिए आवेदन कर सकता है।
वेश्याओं को किसी स्थान से हटाना -मजिस्ट्रेट को सूचना मिलने पर यदि यह लगता है कि उसके क्षेत्राधिकार में कोई वेश्या रह रही है, तो वह उसको वहां से हटने व फिर उस स्थान पर न आने का आदेश दे सकता है।
विशेष न्यायालयों की स्थापना -
इस अधिनियम के अंतर्गत किए गए अपराधों के लिए राज्य सरकार व केंद्र विशेष न्यायालय की स्थापना भी कर सकती है। भारतीय दंड संहिता के अंतर्ग भी महिलाओं व बच्चों को बेचने व खरीदने पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रावधान बनाए गए हैं।
18 साल से कम उम्र की लड़की को गैर कानूनी संभोग के लिए फुसलाना (धारा-366-क)
यदि कोई व्यक्ति किसी 16 साल से कम उम्र की लड़की को फुसलाता है, किसी स्थल से जाने को या कोई कार्य करने को यह जानते हुए कि उसके साथ अन्य व्यक्ति द्वारा गैर कानूनी संभोग किया जाएगा या उसके लिए मजबूर किया जाएगा तो ऐसे व्यक्ति को 10 साल तक की जेल और जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
विदेश से लड़की का आयात करना (धारा 366-ख)
अगर कोई व्यक्ति किसी 21 साल से कम उम्र की लड़की को विदेश से या जम्मू कश्मीर से लाता है, यह जानते हुए कि उसके साथ गैर कानूनी संभोग किया जाएगा या उसके लिए मजबूर किया जाएगा तो ऐसे व्यक्ति को 10 साल तक की जेल और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।
वेश्यावृत्ति आदि के बच्चों को बेचना (धारा-372)
अगर कोई व्यक्ति किसी 18 साल से कम उम्र के बच्चे को वेश्यावृत्ति, या गैर कानूनी संभोग, या किसी कानून के विरूद्ध और दुराचारिक काम में लाए जाने या उपयोग किए गए जाने के लिए उसको बेचता है या भाड़े पर देता, तो ऐसे व्यक्ति को 10 साल तक की जेल और जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
यदि कोई व्यक्ति किसी 18 साल से कम उम्र की लड़की को किसी वेश्या या किसी व्यक्ति को, जो वेश्यागृह चलाता हो या उसका प्रबंध करता हो, बेचता है, भाड़े पर देता है तो यह माना जाएगा कि उस व्यक्ति ने लड़की को वेश्यावृत्ति के लिए बेचा है, जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो जाए।
वेश्यावृत्ति आदि के लिए बच्चों को खरीदना (धारा 373) -
अगर कोई व्यक्ति किसी 18 साल से कम उम्र के बच्चे को वेश्यावृत्ति, या गैर कानूनी संभोग, या किसी कानून के विरूद्ध, और दुराचारिक काम में लाए जाने या उपयोग किए जाने के लिए उसको खरीदता है या भाड़े पर देता है, तो ऐसे व्यक्ति को 10 साल की जेल और जुर्माने से भी दंडित किया जा सकता है।
न्यायालयों के देह व्यापार से संबंधित निर्णय:-
1. उ्रच्चतम न्यायालय ने गौर जैन बनाम भारत संघ में कहा है कि वेश्यावृत्ति एक अपराध है, लेकिन जो महिलाएं देह व्यापार करती है, उनको दोषी कम और पीड़ित ज्यादा माना जाएगा। न्यायालय ने यह भी कहा है कि ऐसी परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं और उनके बच्चों को पढ़ाई के अवसर और आर्थिक सहायता भी दी जानी चाहिए तथा उनको समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए उनकी शादियां भी करवानी चाहिए , जिससे बाल देह व्यापार में कमी हो सके।
2. उच्च न्यायालय ने प.न. कृष्णलाल बनाम केरल राज्य में कहा कि राज्य के पास यह शक्ति है कि वह कोई व्यापार या व्यवसाय जो गैर कानूनी, अनैतिक या समाज के लिए हानिकाकर है, उस पर रोक लगा सकती है

बलात्कारः एक अपराध

बलात्कार क्या है?
कानून की नजर में बलात्कार एक जघन्य अपराध है। आए दिन महिलाएं इसका शिकार हो रही है। महिलाएं सामाजिक रूढ़िवादियों से बचने के लिये इस बात को दबा देती है। इसकी खास वजह पुलिस एवं कोर्ट कचहरी है। कुछ लोग तो पुलिस थानों में सूचना भी नहीं देते हैं।
कानून की नजर में ‘‘किसी महिला के इच्छा के विरूद्ध यदि कोई व्यक्ति उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित करता है, उसे बलात्कार कहते हैं।‘‘
भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत बलात्कार कब माना जाता है:-
  • 15 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ किया गया शारीरिक संबंध बलात्कार कहलाता है।
  • अगर कोई पुरूष महिला की सहमति के बिना उसके साथ शारीरिक संबंध करता है। सहमति किसी तरह से डरा-धमका कर ली गई हो, जैसे उसको मारने, घायल करने या उसके करीबी लोगों को मारने या घायल करने की धमकी देकर ली गई हो।
  • अगर सहमति झूठे प्रलोभन, झूठे वादे तथा धोखेबाजी (जैसे शादी का वादा, जमीन
  • जायदाद या वादा आदि) से ली जाती तो ऐसी सहमति को सहमति नही माना जाएगा।
  •  नकली पति बनकर उसकी सहमति ली गई हो।
  • उसकी सहमति तब ली गई हो जब वह दिमागी रूप से कमजोर या पागल हो।
  • नशीले पदार्थ के सेवन के कारण वह होश में न हो तब उसकी सहमति ली गई हो।
  • 16 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ किया गया शारीरिक संबंध बलात्कार की श्रेणी में आता हो चाहे लड़की की सहमति हो तब भी।

बलात्कार के लिये सजाः
  • सात साल या कारावास जो बढ़कर 10 साल का भी हो सकता है। कुछ मामलों में इसे उम्र कैद में भी बदला जा सकता है। इसके अलावा जुर्माना भी हो सकता है।
  • जिस महिला के साथ बलात्कार किया गया हो, वह उसकी पत्नी हो या 12 साल से कम उम्र की न हो तब उसकी व्यक्ति को 2 साल का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
  • अगर न्यायालय 7 साल से कम की सजा देता है तो उसे लिखित रूप में उसका उचित कारण देना होगा।

विशेष परिस्थितियॉंः
निम्न व्यक्तियों द्वारा किये गये बलात्कार की सजा कम से कम 10 साल का सश्रम कारावास जिसे उम्र कैद तक बढ़ाया जा सकता हैः-
अगर कोई पुलिस अधिकारी निम्न अवस्थाओं में बलात्कार करता हैः-
  • उस थाने के अंदर जिसका वह क्षेत्र अधिकारी हो।
  • उस थानों के अंदर जो उसके अधिकार में न हो।
  • वह महिला जो उसकी हिरासत में या उसके अधीनस्थ अधिकारी की हिरासत में हो।
  • लोक सेवक जो अपने अधिकारों का दुरूपयोग करके उसकी हिरासत में हो या उसके अधीनस्थ की हिरासत में होने वाली महिला के साथ बलात्कार करता है।
  • अस्पताल के प्रबंधक और कर्मचारियों द्वारा अपने अधिकारों का दुरूपयोग करते हुये उनकी देखरेख के अधीन जो महिलाएॅं हों उनके साथ बलात्कार करता हो।
  • गर्भवती महिला के साथ बलात्कार करता हो।
  • जो सामूहिक बलात्कार करता है।

निम्नलिखित परिस्थतियों में शारीरिक संबंध स्थापित करना अपराध माना जाता
हैः-
  • जो व्यक्ति कानूनी तौर पर अलग रहा हो परंतु पत्नी की सहमति के बिना शारीरिक संबंध स्थापित करता हो, उसके 2 साल का करावास और जुर्माना भी हो सकता है।
  • लोक सेवक द्वारा अपने अधिकारों का दुरूपयोग करके, नारी निकेतनों, बाल संरक्षरण गृहों एवं कारावास, अस्पताल या प्रबंधक और कर्मचारियों द्वारा उनके संरक्षण में जो महिलाएॅं हो उनके साथ शारीरिक संबंध स्थापित करता हो, ऐसे सभी अपराधों में 5 साल तक की सजा और जुर्माना दोनो भी हो सकते हैं।

बलात्कार में शोषित महिला कौन-कौन सी सावधनी बरतेंः-
1. अपने सगे सम्बन्धियों या दोस्तों को खबर करें।
2. तक तक स्नान न करें तब तक डॉक्टरी जॉंच व प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज न हो जाए।
3. कपड़े न धोयें क्योंकि वह कपड़े जॉंच का आधार है।
4. प्रथम सूचना रिपोर्ट कराएॅं।
प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखाते समय ध्यान देने योग्य बातेंः-
1. घटना की तारीख
2. घटना का समय
3. घटना का स्थान अवश्य लिखाएॅं
रिपोर्ट लिखाने के बाद उसका एक कॉंपी अवश्य लें जो थाने द्वारा मुफ्त में दी जाती है।
पुलिस का कर्तव्य है कि वह पीड़ित महिला की डाक्टरी जॉंच पंजीकृत डांक्टर से या नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र में करवाकर डॉंक्टरी जॉंच की कॉंपी अवश्य लें।
बलात्कार के समय जो कपड़े पीड़ित महिला ने पहने हैं, डॉंक्टरी जॉंच के बाद पुलिस आपके सामने उन कपड़ों को सीलबंद करेगी, जिसकी रसीद अवश्य ले ले।
बलात्कार के मामले की सुनवाई की प्रक्रियाः-
बलात्कार के मामले की सुनवाई एक बंद कमरे में होती है। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति को वहॉं उपस्थित रहने की अनुमति नही होती है। अगर पुलिस प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने से मना कर दे तो आप निम्न जगहों पर शिकायत कर सकते हैं।
1. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों या
2. मजिस्ट्रेट
घटना की शिकायत विवरण निम्नलिखित जगहों पर लिखकर भेज सकते हैंः-
1.कलेक्टर
2. स्थानीय या राष्ट्रीय समाचार पत्रों में
3. अध्यक्ष राज्य महिला आयोग, एच.आई.जी.-10 कविता नगर अनमोल फ्लैट्स के पास अवंती बिहार रायपुर (छ.ग.) फोनः- 0771-4023996, 4013196
4.राष्ट्रीय महिला आयोग-4, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली-110001

भरण-पोषण महिलाओं के भरण-पोषण संबंधी पति से अधिकार

  • महिलाएं दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-125 के तहत अपने पति से भरण-पोशण प्राप्त करने की हकदार है।
  • भरण-पोषण के लिए महिला सक्षम न्यायालय में साधारण आवेदन देकर अपनी पति के विरूद्ध भरण-पोशण की मांग कर सकती है।
  • न्यायालय की यह जिम्मेदारी है कि वह भरण-पोषण संबंधी आवेदन को जल्द से जल्द तय करे। भरण-पोषण से संबंधित आवेदन को तय करते समय न्यायालय साधारण जांच करेगी न कि कानूनी दांव-पेंच में पड़ेगी। इस प्रकार के आवेदन का फैसला जल्द से जल्द किया जाएगा। न्यायालय जो भी उचित समझे, उतना भरण-पोषण देने का आदेश पारित कर सकता है।
  • न्यायालय भरण-पोषण के आवेदन के तय होने के बीच में अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित कर सकता है।
  • भरण-पोषण को तय करते समय पति के वेतन, आर्थिक स्थिति तथा पत्नी के रहन-सहन के खर्चों को नजर में रखकर दिया जाएगा।

निम्नलिखित दशाओं में महिलाओं को भरण-पोषण नहीं दिया जाएगा -
1- जो जारता (महिला का किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहना) की दशा में रह रही हो।
2- जो अपनी मर्जी से, बिना किसी उचित कारण के पति से अलग रह रही हो।
3- जिसने दोबारा शादी कर ली हो।
4- पारस्परिक सहमति से अगर दोनों अलग-अलग रह रहें हो।
  • यह अधिकार दण्ड न्यायालय या फिर सिविल विधि के अंतर्गत सिविल न्यायालय से लागू कराया जा सकता है।
  • हिन्दू महिलाएं, धारा-24 हिंदू विवाह अधिनियम में भरण-पोषण प्राप्त कर सकती हैं या तलाक में मुकदमें के दौरान महिला इस अधिनियम के तहत भरण-पोषण प्राप्त कर सकती है।
  • धारा-25 हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत तलाक होने पर कोई भी महिला स्थायी भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए न्यायालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकती है।
  • मुस्लिम विवाहित महिला के भरण-पोषण की अवधि इद्दत तक सीमित रखी गई है। इद्दत का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि पत्नी गर्भवती तो नहीं है, अगर वह गर्भवती है तो भरण-पोषण बच्चे के पैदा होने तक मिलता है।
  • मुस्लिम तलाकशुदा महिला भरण-पोषण के लिए अपने मां-बाप, बच्चे या फिर रिश्तेदार जो उसके जायदाद के वारिस होंगे, वक्फ बोर्ड से भरण-पोषण की मांग कर सकती है।
  • मुस्लिम महिला, धारा-125 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत भरण-पोषण का लाभ तभी उठा सकती है, जब वह अपने निकाहनामें में यह लिखे कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-125 के अंतर्गत अर्जी देने से तलाकशुदा औरत अपने शौहर से भरण-पोषण ले सकती है। इससे महिला को भरण-पोषण अन्य महिलाओं की तरह असीमित अवधि तक अपने पति से मिल  सकता है।

भरण-पोषण प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र कहां प्रस्तुत करें ?
  • भरण-पोषण प्राप्त करने हेतु कोई भी महिला एक साधारण प्रार्थना पत्र जिले के सक्षम मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर अपने पति से भरण-पोषण की मांग कर सकती है, जिस जिले में वह निवास करती है।
  • भरण-पोषण प्राप्त करने के लिए कोई भी विवाहित महिला उस जिले के न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय के समक्ष भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकती है, जिस जिले में उसका पति निवास करता हो।
  • भरण-पोषण के लिए उस स्थान पर भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिस स्थान पर दोनों पति-पत्नी अंतिम बार एक साथ रहे हों।

साभार - छत्‍तीसगढ़ राज्‍य विधिक सेवा प्राधिकरण 
 CHHATTISGARH STATE LEGAL SERVICES AUTHORITY 

Category

149 IPC 295 (a) IPC 302 IPC 304 IPC 354 (3) IPC 376 भा.द.सं. 399 IPC. 201 IPC 402 IPC 428 IPC 437 IPC 498 (a) IPC 66 IT Act Abhishek Vaishnav Ajay Sahu Arun Thakur Bail CGPSC Chaman Lal Sinha Civil Appeal D.K.Vaidya Dallirajhara H.K.Tiwari HIGH COURT OF CHHATTISGARH POCSO Ravi Sharma Ravindra Singh Ravishankar Singh SC Shayara Bano Temporary injunction Varsha Dongre अनिल पिल्लई आदेश-41 नियम-01 आनंद प्रकाश दीक्षित आयुध अधिनियम ऋषि कुमार बर्मन एस.के.फरहान एस.के.शर्मा कु.संघपुष्पा भतपहरी छ.ग.टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम छत्‍तीसगढ़ राज्‍य विधिक सेवा प्राधिकरण जितेन्द्र कुमार जैन डी.एस.राजपूत दंतेवाड़ा दुर्ग न्‍यायालय नीलम चंद सांखला पंकज कुमार जैन पी. रविन्दर बाबू प्रशान्त बाजपेयी बृजेन्द्र कुमार शास्त्री भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मुकेश गुप्ता मोटर दुर्घटना दावा राजेश श्रीवास्तव रायपुर लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम श्री एम.के. खान संतोष वर्मा संतोष शर्मा सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू सरल कानूनी शिक्षा सुदर्शन महलवार स्थायी निषेधाज्ञा हरे कृष्ण तिवारी