Friday, 28 October 2016

वन्य प्राणी ( संरक्षण ) अधिनियम,-1972

अधिनियम के उद्वेश्य:-
1. वन्य प्राणियों , पक्षियों , पादपों एवं उनकी विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण प्रबंध एवं उनसे प्राप्त उत्पादों के ब्यापार का नियंत्रण एवं विनियमन करना।
2. वन्य जीव अपराधों की रोकथाम, अवैध शिकार की रोकथाम, वन्य जीव उत्पादों के अवैध ब्यापार एवं प्रभावी नियंत्रण करना।
वन्य जीव संरक्षण में क्या शामिल है।:-
1. वन्य जीवों के आखेट पर प्रतिबंधः- इसमें किसी वन्य प्राणी को फंदे ,जाल, हॉका लगाकर या चारा डालकर फंसाना या उसका प्रयत्न करना, वन्य प्राणी या बंदी प्राणी को आघात पहुंचाना, मारना, विष देना, पकड़ना, कुत्तों द्वारा आखेट करना या उन्हें किसी भी प्रकार के नुकसान पहुंचाना या उन्हें नष्ट करना या प्रयत्न करना, उक्त वन्य प्राणियों के शरीर के कोई भाग ले जाना, जंगली पक्षी या रेगने वाले जन्तु के अंडे नष्ट करना, ले जाना या उनके प्राकृतिक निवास, घोसलों को हानि पहुंचाने आदि पर पूर्णतः प्रतिबंध किया गया है।
2. अभ्यारण्य में निम्न कार्यो पर प्रतिबंध:- वन्य जीवों के संरक्षण हेतु शासन द्वारा बनाए गए अभ्यारण्य में आग लगना, बिना अनुज्ञप्ति के एवं बिना अनुमति के हथियारो के साथ प्रवेश करना या ऐसे अन्य घातक पदार्थ के साथ प्रवेश करना जिससे वन्य जीव को हानि हो सकती है।
3. अधिसूचित वन्य पादपों को हानि पहुचाने पर प्रतिबंध:- केन्द्र शासन द्वारा अधिसूचित वन में लगे पौधों को तोड़ने , जड़ से उखाड़ने , उपरोक्त पौधों को बिना अनुज्ञा अर्जित करने, संग्रहण करने, कब्जे में रखने, बिना अनुमति खेती करने, ब्यापार करने , विक्रय करने, विक्रय का प्रस्ताव देने या अन्य रूप से स्थानातंरित या परिवहन आदि करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
4. वन्य प्राणियों के शरीर के अंगों को ट्राफियों के रूप में बिना अनुज्ञप्ति परिवर्तित कर ब्यापार करने का प्रतिबंधः-वन्य प्राणियों के शरीर के किसी भी अंग को सजावट के रूप में अथवा ट्राफियों के रूप संपरिवर्तित कर अथवा इनके मॉस, चमड़ा या शरीर के अन्य अवयवों का बिना अनुज्ञप्ति मानव उपयोग में लाने, कब्जे में रखने, ब्यापार करना या उपरोक्त का प्रयत्न करने, इनके परिवहन करना आदि पर प्रतिबंध लगाया गया है।
उपरोक्त प्रतिबंधित कार्यो के लिये दण्ड:-
1. अधिनियम के तहत् बने नियम या आदेश या अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा में दिए गए प्रावधान या शर्तो के उल्लघंन पर - तीन वर्ष तक का कारावास या अर्थदंड जो 25000/- रूप्ये तक हो सकता है या दोनों का भागी होगा।
2. वन्य प्राणी के मॉस आदि के या प्राणी वस्तु यास ऐसे प्राणी से ब्युत्पन्न ट्राफी के संबंध में किए गए अपराध या अभ्यारण्य या राष्ट्रीय उद्यान में शिकार करने पर अथवा उसकी सीमाओं में परिवर्तन करने पर- ऐसे कारावास जिसकी सीमा 3 वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जिसका विस्तार 7 वर्ष तक हो सकता है और जुर्मान के साथ भी जो 10000/- रूपये से कम नही होगा- दण्डनीय है  उपरोक्त अपराध पुनः किए जाने पर ’’ ऐसे कारावास जिसकी सीमा 3 वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जिसका विस्तार 7 वर्ष तक हो सकता है, और जुर्माने के साथ भी जो 25000/- रूपये से कम नही होगा -दण्डनीय है।’’
3. उपरोक्त अपराध में उपयोग किए जाने वाले समस्त फंदा , औजार, हथियार, वाहन, जहाज या अन्य वस्तुएं राजसात की जाएंगी तथा ऐसे ब्यक्तियों को यदि कोई अनुज्ञप्ति (लाईसेंस) प्राप्त हो तो उसे निरस्त किया जाएगा।
वन्य प्राणियों के द्वारा पहुचाये गये नुकसान की क्षतिपूर्ति:-
हिंसक वन्य प्राणियों शेर, तेंदुआ, भालू, लकड़बघा, भेड़िया, जंगली सूअर, गौर, जंगली हाथी, जंगली कुत्ता, मगरमच्छ घड़ियाल, वनभैंसा एवं सियार द्वारा पशुओं एवं मनुष्यों को क्षति पहुंचाये जाने पर दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की राशि निम्नानुसार निर्धारित की गयी है:-
01 जनहानि(मृत्यू होने पर) - रूपये 2,00,000/- (दो लाख)
02 स्थायी रूप से अपंग होने पर - रूपये 75,000/- (पचहत्तर हजार)
03 जन घायल होने पर - रूपये 20,000/- (बीस हजार)
04 पशु हानि होने पर - रूपये 15,000/- (पन्द्रह हजार)
हिंसक वन्य प्राणियों द्वारा फसल एवं मकान को क्षति पहुंचाये जाने की स्थिति में क्षतिपूर्ति दिये जाने का प्रावधान है। जंगली जानवरों के अवैध शिकार की सूचना दिये जाने पर पुरस्कार दिये जाने का भी प्रावधान है। विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये वन विभाग कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

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