Saturday, 29 October 2016

ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम 1970

ठेके पर काम करने वाले मजदूरों का शोषण न हो तथा उनके हित सुरक्षित रहें, इसलिए यह कानून बनाया गया है।
यह कानून कहता है:-
1. यदि मालिक ठेकेदार के जरिए मजदूरों को काम पर रखता है, तो मालिक को पंजीकृत होना चाहिए।
2. यदि कोई ठेकेदार 20 या इससे अधिक मजदूर किसी मालिक को देता है तो उसे सरकार से लाइसेंस लेना पड़ेगा।
सुविधायें जो ठेकेदार द्वारा दी जानी चाहिए:-
1. काम करने वाले (मजदूरों) के छः साल से छोटे बच्चों के लिए ठेकेदार को कम से कम दो कमरे अवश्य देने चाहिए। एक कमरा खेलने के लिए और दूसरा सोने के लिए।
2. मजदूरों के लिए पीने का पानी, पर्याप्त संख्या में शौचालय और मूत्रालय, धोने के लिए सुविधाएं और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं।
3. तीन माह तक चलने वाले काम में आराम की सुविधाएं।
4. स्त्रियों के लिए अलग कमरे का प्रबंध।
5. ऐसा काम जो छः माह तक चल सकता है और सौ से ज्यादा मजदूर काम करते हों, तो भोजनालय का प्रबंध।
मजदूरी:-
1. मजदूरी देने की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की है,
2. महीने में कम से कम एक बार मजदूरी मिलनी चाहिए,
3. मजदूरी नगद और बिना कटौती के मिलना चाहिए,
4. मजदूरी मालिक के प्रतिनिधि के सामने दी जानी चाहिए,
5. मजदूरी की दर न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं हो सकती है,
6. ठेकेदार को कमीशन देना मालिक की जिम्मेदारी है, उसे मजदूरी से वसूल नहीं किया जा सकता है।
7. मालिक ठेके के मजदूरों से केवल उतने घंटे काम करा सकता है, जितने घंटे उसके कर्मचारी उसी तरह का काम करते हैं।
8. शिकायत होने पर श्रम अधिकारी को शिकायत दर्ज करने पर 6 माह से एक साल सजा और पांच हजार से दस हजार जुर्माना किया जायेगा।

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